सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसानों और मजदूरों को हुई राहत- जकी गौहरी

बुलंदशहर,आनन्द शर्मा। भारतीय किसान यूनियन आज़ाद द्वारा SIR प्रक्रिया में हो रही परेशानियों को लेकर 26 नवंबर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की गई थी। यह याचिका किसानों, मजदूरों और आम जनता को प्रशासनिक जटिलताओं से राहत दिलाने के उद्देश्य से दायर की गई थी। मामले की जानकारी देते हुए भारतीय किसान यूनियन आजाद के राष्ट्रीय महासचिव ने नगर गुलावठी में मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों को बताया कि उनकी याचिका पर सुनवाई 5 दिसंबर 2025 को होनी थी, लेकिन उससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए SIR प्रक्रिया की अंतिम तिथि 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर 2025 कर दी। यह फैसला उन सभी नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो किसी भी कारणवश तय समय में प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे। भारतीय किसान यूनियन आज़ाद ने इस आदेश का स्वागत करते हुए इसे संगठन की कानूनी और जमीनी संघर्ष की जीत बताया है। आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूनियन के प्रमुख पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। मुख्य रूप से उपस्थित, इंजीनियर शादाब चौधरी- राष्ट्रीय अध्यक्ष (युवा), महराज राव- राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, ज़की गौहरी- राष्ट्रीय महासचिव (युवा) समेत सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। प्रेस वार्ता के मुख्य बिंदु 1.SIR प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों और सुधार की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा। 2.यूनियन द्वारा अब तक की गई कानूनी और ज़मीनी पहल का विवरण। 3.सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसानों और मजदूरों को हुई राहत पर विचार-विमर्श। 4.आगे की रणनीति, जनजागरण अभियान और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संवाद की योजना।इंजीनियर शादाब चौधरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष (युवा) ने कहा, यह फैसला हमारे किसानों और मजदूरों के लिए बड़ी राहत है। हम मांग करते हैं कि SIR प्रक्रिया की समय-सीमा को सिर्फ एक हफ्ते नहीं, बल्कि कम से कम 3 महीनों तक बढ़ाया जाए, ताकि कोई भी परिवार हड़बड़ी और दबाव में न रहे। सरकार और प्रशासन को जमीनी सच्चाई समझकर जनता को पर्याप्त समय देना चाहिए।महराज राव, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ने कहा, SIR प्रक्रिया में अव्यवस्थाओं और भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर हालात गंभीर बने। इसी दबाव में कई BLO और कर्मचारियों को असामान्य तनाव झेलना पड़ा। यूनियन मांग करती है कि जिन BLO की काम के दबाव में जान गई है, उनके परिवारों को सरकार व चुनाव आयोग की ओर से उचित मुआवजा दिया जाए। यह उनका हक है, उपकार नहीं।ज़की गौहरी, राष्ट्रीय महासचिव (युवा) ने कहा, यूनियन की कानूनी और ज़मीनी दोनों स्तरों की मेहनत का यह सकारात्मक परिणाम है। लेकिन असल जीत तब होगी जब SIR प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और जनता के अनुकूल बने। हम आगे भी कोर्ट, सरकार और धरातल तीनों जगह पर संघर्ष जारी रखेंगे। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी किसान, मजदूर या आम नागरिक कागजी झंझटों में न फँसे।भारतीय किसान यूनियन आज़ाद ने स्पष्ट किया कि संगठन किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई हर स्तर पर लड़ता रहेगा। किसी भी जनहित के मुद्दे पर यूनियन अदालत, सरकार और ज़मीन तीनों मोर्चों पर संघर्ष जारी रखेगी।

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